फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संकट: काबुल एयरपोर्ट पर भूख से तड़प रहे लोग, 3000 रुपये में एक बोतल पानी, 7500 रुपये में मिल रहा एक प्लेट चावल

Thu, 26 Aug 2021 09:06 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल

सार

काबुल एयरपोर्ट पर पहुंच रहे लोगों के लिए भी विकट स्थिति खड़ी हो गई है। जानकारी के मुताबिक लोग यहां महंगे भोजन और पानी की वजह से भूखे-प्यासे रहने को मजबूर हो रहे हैं।
विज्ञापन
काबुल एयरपोर्ट - फोटो : US Air Force
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अफगानिस्तान में तालिबानी कब्जे के बाद से आए दिन हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि लोग बिना सामान लिए देश छोड़कर भाग रहे हैं। वहीं काबुल एयरपोर्ट पर पहुंच रहे लोगों के लिए भी विकट स्थिति खड़ी हो गई है। जानकारी के मुताबिक लोग यहां महंगे भोजन और पानी की वजह से भूखे-प्यासे रहने को मजबूर हो रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार काबुल एयरपोर्ट पर एक पानी की बोतल 40 डॉलर यानी 3000 रुपये में मिल रही है। जबकि चावल की एक प्लेट के लिए 100 डॉलर यानी लगभग 7500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं एयरपोर्ट पर पानी या खाना कुछ भी खरीदना हो, यहां अफगानिस्तान की अपनी करेंसी भी नहीं ली जा रही। सिर्फ डॉलर में ही भुगतान स्वीकार किए जा रहे हैं। ऐसे में अफगानी नागरिकों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

विज्ञापन


इतनी महंगाई के कारण लोग भूखे-प्यासे कतार में लग जा रहे हैं। सबसे मुश्किल हालात में बच्चे पड़ गए हैं जो भूख और प्यास के कारण बेहोशी की हालत में पहुंच रहे हैं। हालांकि इन लोगों का हौसला अब टूटने लगा है। शरीर ने जवाब देना शुरू कर दिया है। अधिकतर लोग खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक काबुल एयरपोर्ट के बाहर अब भी 50 हजार से ज्यादा लोग इंतजार कर रहे हैं। इस वजह से यहां इतना भयानक जाम लगा हुआ है कि एयरपोर्ट तक पहुंचना नामुमकिन सा काम है।



बड़ी संख्या में लोग रनवे पर जमा हो गए हैं जो किसी भी तरह से अफगानिस्तान से बाहर निकलना चाहते हैं। ये लोग उन भाग्यशाली लोगों में से थे जिन्हें हवाई अड्डे के अंदर जाने की अनुमति दी गई। एयरपोर्ट के बाहर हालात और भी बुरे हैं जहां हजारों लोग अंदर जाने का इंतजार कर रहे हैं। एयरपोर्ट की दीवार के एक तरफ जहां उम्मीद और खुशी है, वहीं दूसरी तरफ बेबसी और बदहाली है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस भारी भीड़ में किसी को भी कोरोना वायरस के संक्रमण का डर नहीं है। सिर्फ तालिबानी आतंकियों से ही डर है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें