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अध्ययन में दावा: वुहान में पशु बाजार की एक दुकानदार थी कोरोना की पहली ज्ञात मरीज, रिपोर्ट में हुए नए खुलासे

Fri, 19 Nov 2021 06:17 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क

सार

एक समय में पूरी दुनिया के लिए संकट का सबब बनी रही कोरोना वायरस महामारी का पहला ज्ञात मामला डब्ल्यूएचओ की जांच में एक अकाउंटेंट सामने आया था। वहीं, एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि पहला मामला चीन के वुहान में पशु बाजार में काम करने वाली एक महिला हो सकती है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
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कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की जांच पर एक नए अध्ययन में कहा गया है कि संभव है कि इस दौरान महामारी के शुरुआती कालक्रम में गलती हुई हो। अध्ययन में कहा गया है कि कोविड-19 के पहले सिम्टोमैटिक मामला चीन के वुहान में पशु बाजार में सी फूड बेचने वाली एक महिला हो सकती है न कि डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार एक अकाउंटेंट जो कि वहां से काफी दूर रहता था। 

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वुहान शहर ही वह जगह है जहां से साल 2019 में पहली बार जानलेवा कोरोना वायरस उत्पन्न हुआ था और जल्द ही एक वैश्विक महामारी के रूप में बदल गया था। साइंस जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में कहा गया है कि जिस अकाउंटेंट को बड़े स्तर पर कोरोना वायरस का पहला मरीज माना जा रहा है उसने बताया है कि पहली बार उसमें कोरोना के लक्षण 19 दिसंबर को दिखे थे। यह तारीख पहले से ज्ञात दिन से कई दिन बाद की है।

यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना में इकोलॉजी एंड इवॉल्यूशनरी बायोलॉजी के अध्यक्ष माइकल वॉरोबे ने अध्ययन में कहा है कि इस अकाउटेंट में बीमारी के लक्षण दिखने से पहले ही हुआनान बाजार में काम करने वाले लोगों में इसके मामले सामने आ चुके थे। सबसे पहला ज्ञात मामला यहां सी फूड बेचने वाली एक महिला का सामने आया था। अध्ययन के अनुसार इस महिला में 11 दिसंबर को कोरोना वायरस महामारी के लक्षणों की पुष्टि हुई थी।
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डब्ल्यूएचओ की टीम की रिपोर्ट में ये जानकारी
इस साल जनवरी में कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच करने के लिए डब्ल्यूएचओ की ओर से चयनित शोधार्थियों का दल चीन पहुंचा था। इस टीम ने उस अकाउंटेंट से बातचीत भी की थी जिसके बारे में कहा जा रहा है कि उसमें कोरोना महामारी के लक्षण आठ दिसंबर 2019 को दिखे थे। डब्ल्यूएचओ के शोधार्थियों ने अपनी रिपोर्ट मार्च 2021 में जारी की थी और इस अकाउंटेंट को ही कोरोना का पहला ज्ञात मामला बताया था।

डब्ल्यूएचओ की टीम के विशेषज्ञ ने मानी गलती
डब्ल्यूएचओ की इस टीम में शामिल रहे एक इकोलॉजिस्ट पीटीर दास्जाक का कहना है कि मैं वॉरोबे के विश्लेषण से सहमत हूं और हम गलत थे। दास्जाक ने कहा कि आठ दिसंबर की तारीख एक गलती थी। टीम ने अकाउंटेंट से कभी पूछा ही नहीं था कि उसमें बीमारी के लक्षण कब दिखने शुरू हुए थे। उन्हें यह जानकारी हुबेई शिन्हुआ अस्पताल की ओर से दी गई थी। इसी अस्पताल में शुरुआती मरीजों का इलाज किया गया था। 

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