रूस में हाल के वर्षों में महिलाओं के गर्भपात कराने के मामलों में भारी गिरावट आई है। जबकि महिलाओं के शादी करने की औसत उम्र बढ़ी है। साथ ही देश को घट रही आबादी की समस्या से कुछ राहत मिली है। अब आबादी अपेक्षाकृत अधिक स्थिर हो गई है। इन निष्कर्षों का एलान मंगलवार को रूस उप प्रधानमंत्री तात्याना गोलिकोवा ने किया।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक गर्भपात के मामलों में 2016 के बाद 39 फीसदी की गिरावट आई है। गोलिकोवा ने उम्मीद जताई कि अभी जो ट्रेंड देखने को मिल रहा है, वह आगे भी जारी रहेगा। गर्भपात कम कराने का असर यह हुआ है कि देश में बच्चों के जन्म लेने की दर बढ़ी है। इससे घट रही आबादी की समस्या पर कुछ लगाम लगी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2019 में जन्म दर में आठ फीसदी की गिरावट आई थी। लेकिन 2020 में ये गिरावट महज तीन फीसदी रही। पिछले साल देश में 14 लाख शिशुओं का जन्म हुआ।
यह भी देखने में आया है कि पहली बार मां बनने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। गोलीकोवा ने बताया कि ज्यादातर महिलाएं अब 27 से 28 वर्ष की उम्र में पहली बार मां बन रही हैं। यानी देश में धीरे-धीरे मां बनने की औसत उम्र में बढ़ोतरी हो रही है।
रूस में गर्भपात एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इसी महीने रूस की संसद ड्यूमा में कुछ सांसदों ने प्राइवेट क्लीनिकों में गर्भपात कराने पर पूरी तरह से रोक लगाने का बिल पेश किया। अगर ये बिल पारित हुआ, तो फिर गर्भपात सिर्फ सरकारी अस्पतालों में कराया जा सकेगा। बिल पेश करते हुए सत्ताधारी यूनाइटेड रशिया पार्टी की सदस्य इग्ना युमाशेवा ने कहा कि ये कानून बनने से देश में गर्भपात संबंधी सही आंकड़े दर्ज हो सकेंगे। तब यह समझना भी आसान हो जाएगा कि आखिर महिलाएं ऐसा कदम क्यों उठाती हैं। चर्चा के दौरान यूनाइटेड रशिया पार्टी के ही सदस्य व्लादिमीर क्रुपेनिकोव ने गर्भपात को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कह कि ऐसी सभी सामग्रियों के इश्तेहारों पर रोक लगाने की जरूरत है, जो गर्भपात को सुरक्षित बताती हैं।
गौरतलब है कि 1920 में रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) दुनिया का पहला देश बना था, जहां स्वेच्छा से गर्भपात कराने को कानूनी मान्यता दी गई थी। लेकिन सोवियत संघ के बिखराव के बाद देश में माहौल बदल गया। एक मौके पर गर्भपात पर पूरी रोक लगा दी गई थी। लेकिन बात में इसे कुछ शर्तों के साथ इजाजत दी गई। उन शर्तों को सख्त करने की कोशिश में अब इसकी इजाजत सिर्फ सरकारी अस्पतालों में देने का बिल पेश किया गया है।
इसके पहले पिछले साल धुर दक्षिणपंथी सांसद व्लादिमीर झिरिनोवस्की ने प्रस्ताव रखा था कि गर्भपात पर पूरी तरह रोक लगा दी जाए। अगर कोई महिला बच्चा नहीं चाहती है, तो उसके बच्चे का पालन-पोषण का खर्च सरकार उठाए। हालांकि रूस में एक खास बात यह देखने को मिली है कि वहां ऑर्थोडॉक्स चर्च ने गर्भपात पर पूरी रोक की मांग नहीं उठाई है। चर्च ने हाल में कहा कि इस मामले में अधिक लचीला रुख अपनाने की जरूरत है। लेकिन चर्च ने ये मांग जरूर की है कि गर्भपात को स्वास्थ्य बीमा कवरेज से बाहर कर दिया जाए। रूस में सरकारी स्वास्थ्य बीमा फंड से कई तरह की बीमारियों का मुफ्त इलाज होता है। अभी तक इसका कवरेज स्वैच्छिक गर्भपात को भी मिला हुआ है।
जानकारों का कहना है कि गर्भपात के मुद्दे पर रूस में चल रही बहसों पर अकसर रूढ़िवादी सोच हावी रहती है। अब ऐसा लगता है कि उसका असर आम लोगों की सोच पर भी हुआ है। गर्भपात की संख्या में गिरावट संबंधी ताजा आंकड़े इसी बात की तस्दीक करते हैं।