मर्सडीज और पोर्शे कारों के लिए विख्यात जर्मनी के एक राज्य बाडेन वुर्टेमबर्ग ने स्कूलों में बच्चियों के बुर्का और नकाब पहनने पर रोक लगा दी है। अध्यापिकाओं के लिए यहां इस तरह का कानून पहले से ही है। फरवरी में हैम्बर्ग की एक अदालत इसी तरह के एक कानून को अवैध बता चुकी है।
जर्मनी के राज्य बाडेन वुर्टेमबर्ग के मुख्य मंत्री ग्रीन पार्टी के विनफ्रीड क्रेचमन ने कहा है कि उनके राज्य में ऐसा कम ही देखने को मिलता है लेकिन जो भी थोड़े बहुत मामले हैं, उन पर कानूनी रूप से नियंत्रण जरूरी है। देश के स्कूलों में चेहरा या सर ढंकने को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है।
बाडेन वुर्टेमबर्ग में गठबंधन सरकार के मुखिया ने कहा कि जर्मनी एक स्वतंत्र समाज है और चेहरे को पूरी तरह से छिपाना इसका हिस्सा नहीं है। क्रेचमन ने कहा, फिलहाल यह प्रतिबंध सिर्फ स्कूलों में लगाया गया है, कॉलेज या यूनिवर्सिटी में नहीं क्योंकि वयस्कों पर इस तरह का प्रतिबंध लगाना पेचीदा मामला है।
बता दें कि जर्मनी के पड़ोसी देशों फ्रांस, नीदरलैंड, डेनमार्क और ऑस्ट्रिया में बुर्के पर पूरी तरह पाबंदी है, लेकिन जर्मनी में इसे लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में देखा जाता है।
महिलाओं के दमन की वजह से नहीं बना कानून
चांसलर एंगेला मैर्केल की सीडीयू पार्टी के कुछ नेता तो देश भर में इस तरह का प्रतिबंध लगाने की मांग करते आए हैं, लेकिन अब तक ऐसा कानून नहीं बन पाया है। ऐसा इसलिए क्योंकि बहुत से लोगों का मानना है कि इससे देश के मुसलमान हाशिए पर पहुंच जाएंगे। उनका कहना है कि पाबंदी लगाने पर बुर्के और नकाब का इस्तेमाल करने वाली महिलाएं अपने घरों में बंद हो जाएंगी और दमन का शिकार होंगी।
अधिकारों के खिलाफ बताया
इस्लामी कट्टरपंथ के प्रसार के बाद जर्मनी सहित यूरोपीय देशों में मुंह और सिर ढंकने की बहस तेज हो गई। बुर्का और नकाब के विरोधी इसे महिलाओं का दमन करने वाला बताते हैं और यह कहते आए हैं कि छोटी उम्र में ही लड़कियों को चेहरा ढंकने के लिए मजबूर करना उनके अधिकारों के खिलाफ है।