दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से अफ्रीकी चीतों को लाकर भारत में बसाने का प्रोजेक्ट सफल होगा। अगले 6 साल में यहां 50 से 60 चीते दौड़ते नजर आ सकते हैं। यह बात अफ्रीका के चीता व वन्य जीव विशेषज्ञ ने कही। वे खुद भी दक्षिण अफ्रीकी चीतों के बैच के साथ भारत आकर इस प्रोजेक्ट के लिए काम करेंगे।
एमओयू के अगले ही दिन भारत में होंगे चीते
प्रो. ट्रोडिफ ने दावा किया कि भारत और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के बीच एमओयू के अगले ही दिन वे चीतों को लेकर भारत आ जाएंगे। खुद उन्हें भी भारत में चीतों को बसाने के दौरान कई वैज्ञानिक अध्ययन करने व सीखने का अवसर मिलेगा।
मानव हस्तक्षेप बड़ी चुनौती : पहले बैच के चीतों को मध्यप्रदेश के कूनो के जंगल में बसाया जाना है। प्रो. ट्रोडिफ के अनुसार राजस्थान व मध्य प्रदेश के जंगलों में बड़ी संख्या में मवेशियों व मानव हस्तक्षेप चीतों को बसाने में सबसे बड़ी चुनौती हैं। कई जगह बाउंड्री वॉल व बाड़ टूट रही हैं तो वहीं अभी यहां कोई ऐसी प्रजातियां नहीं है जो इन जंगलों पर ज्यादा ध्यान देने के लिए प्रेरित करें।