बांग्लादेश में आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा
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बांग्लादेश में जुलाई के मध्य से शुरू हुई हिंसा में अब तक कुल 44 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई है। आपको बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में हिंसा भड़की है। पांच अगस्त को शेख हसीना ने इस्तीफा दने के बाद बांग्लादेश छोड़ दिया और भारत के लिए रवाना हो गईं थीं। इसके बाद बांग्लादेश में आरक्षण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे। बांग्लादेश के पुलिस मुख्यालय ने बताया कि इस हिंसा में 44 पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है। इनमें 21 कांस्टेबल रैंक के पुलिसकर्मी हैं।
आगे बताया गया है कि 20 जुलाई से लेकर 14 अगस्त के बीच हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों की मौत हुई। रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि जिस दिन शेख हसीना देश छोड़कर भारत चली गईं, उस दिन 25 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। इस तरह हिंसा और दंगों के दौरान एक दिन में सबसे अधिक पुलिसकर्मियों की मौत दर्ज की गई। इसके अलावा, इसके ठीक एक दिन पहले चार अगस्त को 15 पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। आगे बताया गया है कि 14 अगस्त और 21 अगस्त के दिन अस्पताल में इलाज के दौरान दो पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों की सूची में 11 सब-इंस्पेक्टर, आठ सहायक सब-इंस्पेक्टर, तीन इंस्पेक्टर और एक नायक शामिल हैं।
रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद बांग्लादेश में पनपी हिंसा में 230 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा, जुलाई के मध्य से अब तक बांग्लादेश में 600 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। आपको बता दें कि शेख हसीना के इस्तीफे के बाद बांग्लादेश में अंतरिम सरकार का गठन किया गया। नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया था।