यूएनएफपीए के कार्यकारी डॉ. नतालिया कनेम ने बताया कि प्रसव पूर्व लिंग आधारित के कारण लड़कियां ज्यादा लापता हो रही हैं। भारत में लगभग 4,60,000 लड़कियां हर साल जन्म के समय ही लापता हो जाती हैं। भारत की पंजीकरण प्रणाली सांख्यिकीय रिपोर्ट 2018 में जन्म के समय लिंगानुपात दर्ज किया गया है जो 2016-18 की अवधि के दौरान पैदा हुए प्रत्येक 1000 लड़कों के लिए 899 है।
भारत के नौ राज्यों में जन्म के समय लिंगानुपात 900 से कम है। इनमें हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, यूपी, महाराष्ट्र, पंजाब और बिहार शामिल हैं। रिपोर्ट में यूएनएफपीए इंडिया के प्रतिनिधि ने कहा कि हमें समानता, स्वायत्तता और पसंद के सिद्धांतों पर आगे बढ़ने की जरूरत है। डॉ. कनेम ने कहा, हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक सभी लड़कियों के अधिकार और विकल्प पूर्णत: उनके नहीं हो जाते।