पिथौरागढ़ जिले में अब पारंपरिक खेती की जगह प्राकृतिक खेती होगी। विण, मूनाकोट और कनालीछीना विकासखंड से इसकी शुरुआत होगी। पहले चरण में 700 हेक्टेयर भूमि में प्राकृतिक खेती की जाएगी इसके लिए किसानों का चिन्हीकरण होगा। प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय फसलों की ही प्राकृतिक खेती होगी। कम लागत में फसलों का बेहतर उत्पादन कर किसानों की आर्थिकी मजबूत करना इस योजना का उद्देश्य है।प्राकृतिक खेती में फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए रसायनों का उपयोग नहीं होगा। किसान गोमूत्र, बिच्छू घास, नीम सहित अन्य स्थानीय वनस्पतियों और पदार्थों से कीटनाशक तैयार करेंगे। ऐसे जैविक रसायन भी तैयार किए जाएंगे जिनके उपयोग से गोबर सहित अन्य खादों की कमी को पूरा किया जा सकेगा। मुख्य कृषि अधिकारी अमरेंद्र चौधरी ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र गैना किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देगा। खरीफ फसलों की बुआई से यह योजना शुरू होगी।