टिमटिमाती रंग-बिरंगी झालरें। गलियों से लेकर सड़कों तक भीड़ ही भीड़। कहीं झूला, कहीं चरखी तो कहीं खिलौनों की दुकान। रात ढलने के साथ मेले की रौनक में चार चांद लग गए।बीती रात चेतगंज की ऐतिहासिक नक्कटैया के 138वें संस्करण में जहां राष्ट्रगौरव का हर्ष अभिव्यक्त हुआ, वहीं वैश्विक विषाद की झलक देखने को भी मिली। विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भारतीय उपलब्धियों पर केंद्रित झांकी भारत के उत्थान की कहानी कह रही थी। वहीं, हमास-इस्राइल, रूस-यूक्रेन युद्ध की विभीषिका वैश्विक विषाद का आभास भी दे रही थी। आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित झांकी भी परंपरागत लाग-विमानों की कतार में अपने होने का आभास करा रही थी।