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ऐतिहासिक है सुल्तानपुर स्थित लोहरामऊ देवी धाम, लगता श्रद्धालुओं का तांता

यूपी के सुल्तानपुर स्थित लोहरामऊ दुर्गा देवी भवानी मंदिर में नवरात्र पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। 20 दशक पहले यहां जंगल था। इसमें लोग अपने पशुओं को चराते थे। नीम के पेड़ के नीचे एक चरवाहे को सर्वप्रथम मां भवानी के पिंडी रूप का दर्शन हुआ। फिर, वहां ग्रामीण चबूतरा बनाकर पूजा शुरू किए थे। बाद में पत्थर व संगमरमर की मां भगवती की प्रतिमा स्थापित कर 1991 में विशाल भगवती देवी मंदिर का निर्माण कराया गया। लोहरामऊ देवी मंदिर अति प्राचीन है जो मुगलकाल से पहले बना था। पुराने मंदिर को तोड़कर जब 1991 मे मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाने लगा तो मंदिर की दीवारों में लखौरी ईंटे मिली थीं। जो मुगल काल में पाई जाती थीं। मंदिर में देवी दुर्गा का स्वेत संगमरमर की मर्ति है, उसके पीछे पुरानी प्रतिमा है। परिसर में ही हनुमानजी, श्री राम दरबार राधेकृष्ण सहित अन्य देवी देवताओ की प्रतिमा भी मौजूद हैं। दुर्गा देवी मंदिर में शारदीय व चैत्र नवरात्रि में नौ दिनों मेले जैसा रूप रहता है। सुबह से शाम तक पूरे दिन यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। दूर दराज से महिलाएं यहां आकर मां भगवती को कड़ाही देकर मन्नत मांगती हैं। लोहरामऊ दुर्गा देवी मंदिर लखनऊ-वाराणसी हाइवे के किनारे है। जहां पर रोडवेज बस से पयागीपुर के रास्ते लोहरामऊ बाजार पहुंच सकते हैं। वहीं बस स्टॉप व रेलवे स्टेशन से ऑटो या टैंपो से राहुल चौराहे होकर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। निजी साधन से भी इसी रास्ते से मंदिर तक लोग पहुंचते है। मंदिर के पुजारी पं राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने बताया कि मंदिर खुलने का समय आम तौर पर सुबह सात बजे है। लेकिन, नवरात्रि में मंदिर खुलने का समय सुबह पांच बजे रहता है। सुबह साढ़े पांच व शाम सात बजे देवी मां की आरती की जाती है। दिनभर मंदिर खुला रहता है। देर रात भक्तों का तांता लगा रहता है।

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