यूपी के श्रावस्ती में ठंड बीतने वाली है और आगामी कुछ महीनों में एक बार फिर बरसात दस्तक देने वाली है। जिसको लेकर एक बार फिर राप्ती नदी की कछार में बसे 11 गांवों के ग्रामीणों को बाढ़ व कटान का खतरा सताने लगा है। खास कर बीते वर्ष कटान का दंश झेल चुके कथरामाफी, घाटेपुर व वीरपुर के ग्रामीण सहमे हुए हैं। ग्रामीण बाढ़ से पहले ही राप्ती नदी की मुख्य धारा में जमा रेत व झाड़ियों को हटाने या फिर तटबंध बनाने की मांग कर रहे हैं। नेपाल से निकलकर तराई में पहुंचने वाली राप्ती नदी ने बीते साल 2025 में जमुनहा तहसील क्षेत्र में जमकर कहर बरपाया था। नदी की क्रूर लहरों ने जहां सैकड़ों बीघा फसल को लील लिया था तो वहीं 40 से बीघा से अधिक में लगे बागों को काट कर समाहित कर लिया था। वहीं नदी की धारा का बेग भिनगा-मल्हीपुर मार्ग भी झेल नहीं सका और कट गया था। जो अभी तक बनाया नही गया है और ग्रामीणों जोखिम उठाकर आवागमन कर रहे हैं। बीते वर्ष की दर्दनाक यादों के चलते स्थानीय ग्रामीण इस बार बाढ़ से पूर्व तटबंध बनाने की मांग कर रहे हैं। बताते चलें कि बीते साल खेतो की कटान रोकने के लिए घाटेपुरवा गांव के पास बांस पिजरों में बोरी डाल कर रखी गई थी, जिसमें से अधिकांश बह गए हैं। जिसके चलते एक बार फिर कथरा माफी, हसनापुर, बरंगा, सलारूपुरवा, लौकिहा प्रथम, लौकिहा द्वितीय, लौकिहा तृतीय, वीरपुर, शिकारी चौड़़ा, हरिहरपुर आदि गांवों के ग्रामीणों को कटान का खतरा सता रहा है। घाटेपुरवा निवासी राधेश्याम यादव ने बताया कि नेपाल से निकल कर राप्ती मुख्य रूप से घाटेपुरवा, कथरामाफी व वीरपुर में कहर बरपाती है। ऐसे में अगर कथरा माफी से मधवापुर घाट तक पांच किमी तक तटबंध बन जाए तो कटान प्रभावित 11 गांवों का वजूद बच सकता है। घाटेपुरवा निवासी रामदयाल ने बताया कि राप्ती नदी की मुख्य धारा में रेत जमा है, जिसके चलते नदी की धारा किनारों पर बहती है और कटान करती है। अगर मुख्य धारा से कटान व झाड़ियों को हटा दिया जाए तो बहुत राहत मिलेगी। नदी के पूवीं छोर पर बने बांध के कारण जिला मुख्यालय सहित क्षेत्र के तमाम गांव बाढ़ व कटान से बच जाते हैं। वीरपुर निवासी भल्लर ने बताया कि राप्ती नदी के बाढ़ का पानी मल्हीपुर स्थित जमुनहा ब्लॉक व जमुनहा तहसील के साथ-साथ सीएचसी मल्हीपुर में भी भर जाता है। इससे इलाज में भी दिक्कत होती है। ऐसे में शासन-प्रशासन को तटबंध निर्माण करवाना चाहिए।