मुजफ्फरनगर। बैंक्वेट हॉल और रेस्टोरेंट के अनापत्ति प्रमाणपत्र की एवज में 20 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पकड़े गए लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ लिपिक सचिन की जमानत अर्जी खारिज हो गई। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम न्यायालय मेरठ के पीठासीन अधिकारी प्रमोद कुमार गंगवार ने सुनवाई की।
फलावदा के नागोरी गांव निवासी सेवानिवृत्त दरोगा सतेंद्र सिंह ने मीरापुर-खतौली मार्ग पर चुड़ियाला गांव में सात बीघा जमीन पर बैंक्वेट हॉल और रेस्टोरेंट बनाया है। दमकल और लोनिवि की एनओसी के लिए उन्होंने 12 नवंबर को आवेदन किया था। आरोप लगाया कि शहर के मेरठ रोड स्थित प्रांतीय खंड कार्यालय में कनिष्ठ लिपिक सचिन ने पहले 40 हजार रुपये की मांग की बाद में 25 हजार रुपये में एनओसी देना तय हो गया। इस दौरान सेवानिवृत्त दरोगा ने सहारनपुर में एंटी करप्शन टीम को जानकारी दी। तीन दिसंबर को एंटी करप्शन टीम के इंस्पेक्टर यशपाल सिंह ने आरोपी को पकड़ लिया था। पुलिस ने चार दिसंबर को आरोपी को मेरठ कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उसे जेल भेज दिया गया था। बचाव पक्ष की ओर से मेरठ कोर्ट में सचिन की जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया, जिसे खारिज कर दिया गया है।