रेलवे स्टेशन मिर्जापुर परिसर में विभिन्न जड़ी-बूटी और औषधियों को संजोकर रखने के लिए विंध्य रेल औषधि वाटिका का निर्माण किया गया था, पर वर्तमान समय में हाल ऐसा है कि औषधि वाटिका में औषधि छोड़कर अन्य पेड़-पौधे और घास उग गए है। वाटिका जंगल बन गया है। अमृत भारत योजना से रेलवे स्टेशन का कायाकल्प हो रहा है, पर औषधि वाटिका की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। रेलवे स्टेशन मिर्जापुर परिसर में लाखों की लागत से 15 वर्ष पहले स्थापित औषधि वाटिका का निर्माण कराया गया था। यहां पर अश्वगंधा, सफेद मुसली, तुलसी, सौंफ, सर्प गंधा आदि जड़ी बूटियाें के पौधे लगाए गए थे। रेलवे कर्मचारियों के साथ अन्य लाेग वाटिका में आते थे। इससे लोगाें को औषधि वाटिका में लगे औषधियों के बारे में भी जानकारी मिलती थी। पहले तो रख रखाव न होने से जड़ी-बूटियां सूखने लगी हैं। अब तो यहां पर लोग आते ही नहीं हैं। हालत ये है कि औषधि वाटिका में अब औषिधाें का ही पता नहीं है। वाटिका जंगल में तब्दील हो गया है। गेट पर ताला बंद रहता है। अंदर पेड़, पौधे और घास उग गए है। ये हाल तब है जब रेलवे स्टेशन मिर्जापुर का करोड़ों की लागत से कायाकल्प हो रहा है, पर औषधि वाटिका की बदहाली दूर करने की ओर रेलवे प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है। बोले अधिकारी रेलवे स्टेशन का कायाकल्प हो रहा है तो औषधि वाटिका में भी निर्माण कार्य होगा। उसे भी बेहतर किया जाएगा। जिससे कि औषधि वाटिका में औषधि पौधों को संरक्षित किया जा सके। - अमित सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे