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Meerut: चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के उर्दू डिपार्टमेंट में “बर्ग-ए-आवारा” का विमोचन, पहुंचे कई शायर

मेरठ। अदना इश्क़ाबादी ने उर्दू ग़ज़ल को उस लेवल पर ले जाने की कोशिश की जहाँ सोच की एक नई दुनिया की संभावनाएँ थीं। मुकर्रम साहब एक उस्ताद शायर थे, जिन्होंने सैकड़ों शायर बनाए। वह अपना फ़र्ज़ समझते थे। अदना ने ग़ज़लों को एक तरफ़ रचनात्मक खूबसूरती दी तो दूसरी तरफ़ उन्हें असलियत का आईना बनाया। ये शब्द थे प्रो. असलम जमशेदपुरी के, जो डॉ. मुकर्रम अदना इश्क़ाबादी की याद में उनकी जयंती पर उर्दू विभाग में आयोजित उनके काव्य संग्रह “बर्ग-ए-आवारा” के विमोचन समारोह में अपना अध्यक्षीय वक्तव्य दे रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि अदना इश्क़ाबादी की लिखी ग़ज़लों का आकलन किया जाना चाहिए। उनकी ग़ज़लों में जज़्बात ज़ाहिर होने चाहिए। उनकी कुछ नज़्में रिवाज़ के ख़िलाफ़ भी हैं। इससे पहले, कार्यक्रम की शुरुआत मुहम्मद नदीम ने पवित्र कुरान की तिलावत से की। मशहूर शायर वारिस वारसी ने नात और फरहत अख्तर ने अदना इश्काबादी की ग़ज़ल पेश की। कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर शायर असरार-उल-हक असरार ने की । युवा नेता आदिल चौधरी और शहर काज़ी ज़ैनुल-सल्किन ने मुख्य अतिथि और प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस गाज़ी, मशहूर शायर शादान फलावदी और फ़ैज़ महमूद ने विशिष्ट अतिथिगण के तौर पर हिस्सा लिया। स्वागत भाषण डॉ. शादाब अलीम ने, पुस्तक परिचय डॉ इरशाद स्यानवी ने, संचालन दानिश ग़ज़ल और आभार फख़री मेरठी ने किया।

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