मेरठ। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के अटल सभागार में अनुभूति नाट्य इकाई कानपुर, लेखक राजेंद्र कुमार शर्मा और रतन राठौर द्वारा निर्देशित दिल की दुकान नाटक का मंचन किया गया। हिन्दी हास्य नाटक दिल की दुकान के लेखक श्री राजेन्द्र कुमार शर्मा ने अपने इस नाटक में तीन परिवारों के माध्यम से समाज को एक शिक्षा दी है जहां ये परिवार रहते हैं वहीं पड़ोस में एक दुकान खुलती है जिसका नाम है दिल की दुकान इस दुकान में दिलों के खरीदने और बेचने का कारोबार होता है। इस दुकान के माध्यम से किसी का भी दिल बदला जा सकता है और अपने माफिक दिल लगवाया जा सकता है। पहला परिवार जिसमें पति बहुत ही पल्ले दर्जे का कंजूस है, कबाड़ से जिन कपों की ठंडी टूटी हो उन्हीं को घर में लाता है उसका तर्क है चाय इसमें भी पी जा सकती है पैसे खर्चने की क्या जरूरत है इस प्रकार की रोज कोई न कोई हरकत करता रहता है, पत्नी बहुत दुखी है तंग आ कर इनका दिल बदलवा देती है और एक बादशाह का दिल लगवा देती है फिर क्या था अपना धन दोनों हाथों से लुटाना शुरु कर देते हैं-पत्नी बहुत दुखी है अब क्या करें अच्छा बादशाह का दिल लगवा दिया यह तो सारा घर ही लुटानें पर तुले हैं।