बारिश की पहली फुहार के साथ ही कानपुर-प्रयागराज नेशनल हाईवे पर एक नजारा आम हो गया है। रिमझिम बारिश के बीच हाईवे के किनारे सैकड़ों किसान अपने खेतों से तोड़े हुए ताजे मकई के भुट्टे लेकर बैठे हैं। भीगते हुए लोग गाड़ी रोककर गरम-गरम भुट्टे का आनंद ले रहे हैं और किसान भी उम्मीद भरी निगाहों से अपना माल बेच रहे हैं। महराजपुर के तिवारीपुर के एक किसान ने बताया कि एक बीघे में भुट्टे की लागत करीब 6 से 7 हजार रुपये आ जाती है। लेकिन जब व्यापारी खेत से थोक में खरीदने आते हैं तो 4 से 5 हजार रुपये ही देते हैं। ऐसे में सीधा नुकसान होता है। इसी नुकसान से बचने के लिए हाईवे किनारे गांव होने का फायदा उठाकर किसान खुद अपने खेतों से भुट्टे तोड़कर लाते हैं। फिर अंगीठी पर सेंककर नींबू और नमक लगाकर 5 रुपये प्रति पीस के हिसाब से बेचते हैं। इस बार बारिश देर से हुई है, इसलिए किसानों को फसल बेचने में भी परेशानी हो रही है। बावजूद इसके हल्की बारिश में भी लोग भुट्टे का देसी स्वाद लेने से पीछे नहीं हट रहे। हाईवे से गुजरते वाहन चालक गाड़ी रोककर भुट्टे खरीद रहे हैं और बारिश का लुत्फ भी ले रहे हैं। हालांकि सुरक्षा को लेकर एनएचएआई और पुलिस की टीम ने किसानों को चेताया है। टीम का कहना है कि हाईवे पर वाहनों की रफ्तार तेज होती है। इस तरह किनारे बैठकर सामान बेचना खतरनाक हो सकता है। इसलिए किसानों को हाईवे से कुछ दूरी बनाकर ही बिक्री करनी चाहिए। भुट्टे की खुशबू, बारिश की ठंडक और किसानों की मेहनत इस मौसम में हाईवे को एक अलग ही रंग दे रही है।