केशवनगर में मंगलवार को केडीए के प्रवर्तन दस्ते ने अवैध रूप से बसी बस्ती पर बुलडोजर चलाकर तीन हजार वर्ग मीटर जमीन खाली कराई। इस दौरान अवैध कब्जेदारों ने हंगामे की कोशिश भी की, लेकिन पुलिस बल होने के चलते किसी की नहीं चली। अपना घर टूटता देख महिलाओं के आंसू निकल आए। दोपहर एक बजे केडीए के विशेष कार्याधिकारी सत शुक्ला, अधिशासी अभियंता माधवी कुशवाहा व अन्य हनुमंत बिहार पुलिस व पीएसी के साथ बस्ती पहुंचे और घर खाली करने के लिए अनाउंसमेंट किया। बस्ती में रहने वाले गया प्रसाद, रमेश, माया देवी, रूपरानी सहित अन्य लोग टीम के पास पहुंचे। उन्होंने हाथ जोड़कर अनुरोध किया कि बस्ती न गिराई जाए। अधिकारियों को कहना था कि पांच दिन की मोहलत पूरी हो चुकी है। इसके बाद टीम ने चार बुलडोजर मकानों पर चलना शुरू कर दिए। बस्ती में रहने वाले रामपाल सांस की बीमारी से जूझ रहे थे। पिछले कई दिनों से वह बीमार हैं। जैसे ही बुलडोजर उनके घर चला तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। रामपाल ने बताया कि 25 साल से रह रहे थे। मायावती की सरकार में बस्ती को मलिन बस्ती घोषित किया गया था। इसके पट्टे के कागज बस्ती में रहने वाले भारत के पास थे लेकिन कुछ साल पहले आग लगने से बस्ती के कागज भी जल गए। केडीए कई बार जाकर पट्टा का कागज मांगा लेकिन वहां से नहीं मिला। इधर, बच्चों और महिलाओं की चीख पुकार के बीच बुलडोजर चलता रहा। करीब एक घंटे चली कार्रवाई के बाद सभी अवैध कब्जे ढहा दिए गए।