कानपुर। वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया शोधकर्ता विजय दत्त श्रीधर ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर अपने विचार रखते हुए कहा कि पहले पत्रकारिता में प्रतिष्ठा का महत्व अधिक होता था, जबकि अब संसाधनों का दायरा बड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि उनके संग्रहालय में हिंदी पत्रकारिता से जुड़े कई दुर्लभ और पुराने संस्करण सुरक्षित रखे गए हैं, जिन पर लगातार शोध कार्य भी होते रहते हैं। यहां करीब 30 हजार से अधिक पत्र-पत्रिकाओं के शीर्षक मौजूद हैं। विजय दत्त श्रीधर ने कहा कि इन ऐतिहासिक पत्र-पत्रिकाओं के आधार पर अब तक एक हजार से अधिक शोधार्थी पीएचडी पूरी कर चुके हैं। यह सामग्री हिंदी पत्रकारिता के इतिहास और उसके विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।