साढ़ इलाके के महोलिया गांववासी भी आठ वर्षों से लापता रामशरण को नहीं देखा है। पुलिस भी आज तक कोई ठोस सुराग नहीं जुटा सकी। कोविड महामारी के दौरान कई अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार बिना पहचान के हुआ, जिससे जांच में यह आशंका जोड़ी गई कि सांस की पुरानी बीमारी झेल रहे रामशरण की उस कठिन दौर में गुमनामी में मौत हो गई हो। परिजन हालांकि अब भी जिंदा लौटने की उम्मीद नहीं छोड़ पाए हैं।