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ट्रेडिंग से डिजिटल सर्विस तक... कानपुर में कंपनियों से ज्यादा बन रहीं LLP

कानपुर के उद्यमी अब कारोबार बढ़ाने के लिए पारंपरिक कंपनी ढांचे के बजाय लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) को तेजी से अपना रहे हैं। आसान पंजीकरण, कम अनुपालन और साझेदारी की सुविधा के कारण उद्यमियों में इसका आकर्षण बढ़ा है। इसका असर कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। जनवरी से जून तक कानपुर में 10,619 एलएलपी पंजीकृत हुए हैं। व्यापारिक गतिविधियों के लिहाज से पहचाने जाने वाले कानपुर में एलएलपी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल ट्रेडिंग, होलसेल और आयात-निर्यात से जुड़े कारोबारियों ने किया है। प्रोफेशनल सर्विस, रियल एस्टेट, डिजिटल सर्विस और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के उद्यमियों ने भी इस ढांचे को अपनाया है। एमसीए के आंकड़ों के अनुसार मार्च में सबसे अधिक 2,087 एलएलपी पंजीकृत हुए। जनवरी में 2,016, मई में 1,843, फरवरी में 1,760 और अप्रैल में 1,562 एलएलपी दर्ज किए गए। जून में संख्या घटकर 1,351 रही जो छह माह की अवधि में सबसे कम थी। वहीं मई में कंपनियों के पंजीकरण में सर्वाधिक उछाल देखा गया। इस माह 580 कंपनियों का पंजीकरण हुआ। जनवरी में 485, मार्च में 470, अप्रैल में 442 और फरवरी में 419 कंपनियों का पंजीकरण हुआ। जून में यह संख्या घटकर 396 रह गई जो छह महीनों में सबसे कम थी। दरअसल कारोबारियों के बीच एलएलपी की लोकप्रियता का बड़ा कारण इसका सरल अनुपालन है। इसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर पंजीकरण करा सकते हैं। साल में केवल दो रिटर्न दाखिल करने होते हैं और आम सभा जैसी औपचारिकताओं की जरूरत नहीं होती। कंपनी मंत्रालय को भी अपेक्षाकृत कम जानकारियां देनी होती हैं। वहीं कंपनी का पंजीकरण कराने के बाद चार-पांच से अधिक अनिवार्य रिटर्न दाखिल करने होते हैं। आम सभा करना जरूरी होता है और निदेशक, कंपनी की गतिविधियों समेत कई जानकारियां समय-समय पर एमसीए को देनी पड़ती हैं। अब कंपनी के कार्यालय स्थल का फोटो भी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।

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