सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को लेकर प्रशासन की सख्ती के बावजूद लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के औचक निरीक्षण में प्राथमिक विद्यालय लोधवा खेड़ा में शिक्षिकों की उपस्थिति की पोल खुल गई। विद्यालय में तैनात पांच शिक्षकों में चार अनुपस्थित मिले, जबकि 106 नामांकित बच्चों में महज तीन विद्यार्थी स्कूल पहुंचे थे। पढ़ाई व्यवस्था की इस बदहाल स्थिति पर डीएम ने खंड शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार सिंह का वेतन रोकने और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए। वहीं छात्रों के पंजीकरण पर सवाल खड़े कर जांच के निर्देश दिए। जिलाधिकारी सोमवार को बिल्हौर तहसील दिवस में पहुंचने से पहले स्कूल का निरीक्षण करने पहुंच गए। जिलाधिकारी को देख शिक्षक हैरान हो गए। उन्होने सबसे पहले शिक्षकों की उपस्थिति देखी तो केवल शिक्षामित्र महेश प्रसाद मिले। प्रभारी प्रधानाध्यापक रंजना गुप्ता और शिक्षिका क्षमा श्रीवास्तव आकस्मिक अवकाश पर थीं। शिक्षिका साफिया खातून अंसारी बीआरसी में आयोजित प्रशिक्षण में गई थीं, जबकि सबीहा हसन जैदी चिकित्सकीय अवकाश पर थीं। एक ही दिन पांच में से चार शिक्षकों के विद्यालय में मौजूद न होने और 106 में से केवल तीन बच्चों की उपस्थिति पर डीएम ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने तुंरत इसको लेकर खंड शिक्षा अधिकारी से बात की तो वो कोई जवाब नहीं दे सके। इसपर उन्होनें बीएसए से भी नाराजगी जताई। डीएम ने कहा कि विद्यालय में शिक्षकों की उपलब्धता और बच्चों की नियमित उपस्थिति की निगरानी सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। डीएम लापरवाही पर खंड शिक्षा अधिकारी का वेतन रोकने के निर्देश दिए। साथ ही बीएसए से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।