कानपुर पुलिस में तैनात एक सिपाही के नशा तस्करों से गठजोड़ का बड़ा मामला सामने आया है। आंतरिक जांच में खुलासा हुआ कि पुलिसकर्मी तस्करों को संरक्षण देकर मोटी कमाई कर रहा था और इसी दौरान उसने करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति बना ली। मामले में एक दरोगा और तीन हेड कॉन्स्टेबल को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
जांच में सामने आया कि सचेंडी थाने में तैनात रहे हेड कॉन्स्टेबल जितेंद्र प्रताप सिंह के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगालने पर कई नशा तस्करों के नंबर मिले। इसके बाद मोबाइल की जांच में ऐसे ऑडियो भी सामने आए, जिनमें वह तस्करों को पुलिस कार्रवाई से बचने और माल हटाने के तरीके बता रहा था।
पुलिस कमिश्नरेट की जांच में पता चला कि पुलिसकर्मी तस्करों को व्हाट्सएप इमोजी, कॉल या मिस कॉल के जरिए छापेमारी से पहले अलर्ट कर देते थे, जिससे वे समय रहते ठिकाना खाली कर देते थे।
जितेंद्र प्रताप सिंह ने मंधना क्षेत्र में 600 गज का प्लॉट खरीदा और 200 गज में मकान बनवाया। इसके अलावा पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर कई बेनामी संपत्तियां भी सामने आई हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विभागीय जांच जारी है और दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।