गोंडा में कड़ाके की ठंड व शीतलहर के बीच प्रशासन जहां शहर में 100 से अधिक स्थानों पर अलाव जलाने का दावा कर रहा है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिख रही है। पारा 9 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे पहुंच चुका है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर अलाव या तो गायब हैं या फिर गीली लकड़ियों के कारण सिर्फ धुआं छोड़ रहे हैं। अमर उजाला की लाइव पड़ताल में सरकारी इंतजामों की पोल खुलती नजर आई। शहर में शीतलहर चरम पर है, लेकिन अलाव की व्यवस्था कागजी दावों तक सीमित दिखाई दे रही है। सवाल उठ रहा है कि क्या ठंड से बचाव के इंतजाम सिर्फ निरीक्षण और फोटो तक ही सीमित रहेंगे? लाइव पड़ताल साफ संकेत देती है कि ठंड से राहत के सरकारी दावे और जमीनी सच्चाई के बीच खाई लगातार गहराती जा रही है।