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गोंडा के पृथ्वीनाथ मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़, अज्ञातवास के समय पांडवों ने की थी स्थापना

सावन माह शुरू हो गया है। शिव मंदिरों पर आस्था उमड़ रही है। हर कोई भगवान भोलेनाथ की आराधना में लगा हुआ है। गोंडा के खरगूपुर स्थित पृथ्वीनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। कहा जाता है कि इसकी स्थापना पांडवों ने की थी। महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां पर प्रवास किया था। उस वक्त भीम ने शिवलिंग की स्थापना की थी। यह साढ़े पांच फीट फुट ऊंचा है। काले कसौटी के पत्थरों से यह शिवलिंग निर्मित है। पुरातत्व विभाग की जांच में पता चला कि यह शिवलिंग 5000 वर्ष पूर्व महाभारत काल का है। जिला मुख्यालय से 33 किमी की दूरी पर पृथ्वीनाथ मंदिर स्थित है। इसके समीप खरगूपुर कस्बा है। यहां पहुंचने के लिए जिला मुख्यालय से वाया इटियाथोक या आर्यनगर-खरगूपुर-असिधा होते हुए निजी साधनों से पहुंचा जा सकता है। आर्यनगर व इटियाथोक से टैक्सी वाहन भी मिलते हैं। मंदिर में स्थापित शिवलिंग एशिया में सबसे ऊंचा बताया जाता है। यहां दर्शन अवधि में नेपाल तक से श्रद्धालु पूजन अर्चन के लिए पहुंचते हैं। पुजारी जगदंबा प्रसाद तिवारी ने बताया कि पौराणिक पृथ्वीनाथ मंदिर का अलग महत्व है। इसकी स्थापना पांडवों ने की थी। यहां का शिवलिंग सबसे ऊंचा है। यहां पर जलाभिषेक का विशेष महत्व है। यहां पर स्थापित शिवलिंग की उंचाई इतनी है कि एड़ी उठाकर ही जलाभिषेक किया जा सकता है। सावन माह भगवान भोलेनाथ का माह है। इसका विशेष महत्व है। इसलिए इस माह में पड़ने वाले सोमवार व शुक्रवार को भगवान शिव का पूजन करने से मन वांछित फल प्राप्त होता है।

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