लौलहा गेट से नायकडीह गांव को जोड़ने वाले करीब दो किलोमीटर लंबे संपर्क मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर रविवार को ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। वर्षों से केवल मिट्टी डालकर छोड़े गए मार्ग पर धान की रोपाई कर ग्रामीणों ने अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो गांव में 'सड़क नहीं तो वोट नहीं' के बोर्ड लगाए जाएंगे। ग्रामीणों का कहना है कि मार्ग पर आज तक पक्की सड़क नहीं बनी। बरसात में मिट्टी का रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे आवागमन मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में करीब 1200 से अधिक ग्रामीणों को दो किलोमीटर की दूरी तय करने के बजाय आठ किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाकर गांव आना-जाना पड़ता है। इससे किसानों, छात्रों, महिलाओं और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी होती है।प्रदर्शन में संतोष यादव, शैलेश यादव, मनीष यादव, आकाश यादव, शरद सिंह यादव, रामप्रताप यादव, सुनील यादव, मोनू यादव, संतू राजभर, तेजू यादव, सुरेंद्र यादव, प्रमोद यादव, गन्नू यादव, बिंदु यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर भी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने को है, लेकिन सड़क की समस्या दूर करने के लिए कोई पहल नहीं की गई।ग्रामीणों ने बताया कि यह वही गांव है जिसे कभी पूर्व सांसद मनोज सिन्हा ने गोद लेकर आदर्श गांव घोषित किया था, लेकिन आज भी गांव मूलभूत सड़क सुविधा से वंचित है। रामकृष्ण सिंह अलगू ने कहा, "बरसात शुरू होते ही यह रास्ता दलदल बन जाता है। कई बार शिकायत की, लेकिन आज तक सड़क निर्माण नहीं कराया गया।" पर्मिला यादव ने कहा, "दो किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए आठ किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है। इससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं।" किरन कुमार यादव ने कहा, "आदर्श गांव का दर्जा मिलने के बाद भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिल पाई। अब आंदोलन तेज किया जाएगा।" बिंदु यादव ने कहा, "यदि जल्द सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ तो गांव में 'सड़क नहीं तो वोट नहीं' अभियान चलाया जाएगा और चुनाव में इसका जवाब दिया जाएगा।"