सुहाग नगरी के चंद लोग ऐसे हैं जो आपदा में लोगों के लिए भगवान बनकर जान बचाने का काम करते हैं। इसमें शीनू अग्रवाल, मीनू अरोड़ा और डॉक्टर अमित गुप्ता मुख्य रूप से हैं। युवा शीनू अग्रवाल ने 10 साल पहले रक्तदान का सिलसिला शुरू किया जो अनवरत आज तक जारी है। वह महज एक फोन पर किसी अजनबी को भी अपना रक्त देने से गुरेज नहीं करती हैं। उनका कहना है इससे उनका बेहद सुकून और शांति मिलती है। इसी तरह मीनू अरोड़ा कई बार रक्तदान कर लोगों की जान बचा चुकी है। सेंट जॉन स्कूल की शिक्षिका मीनू अरोड़ा का कहना है कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है इसके कारण वह मुसीबत में लोगों को रक्तदान करने से पीछे नहीं हटती हैं उनका कहना है कि इससे उनका खून का रिश्ता डोनर से बन जाता है। डॉ अमित गुप्ता की बात कर तो वह 30 से अधिक बार रक्तदान कर लोगों की जान बचा चुके हैं अमर उजाला के रक्तदान शिविर में वह पिछले 10 सालों से जुड़े हुए हैं इसके अलावा वह कई बार कैंप का आयोजन भी कर चुके हैं अमित गुप्ता को इसके कारण कांच नगरी के लोगों ने रक्तबीर की नाम की संज्ञा दी है।