देव दीपावली की शाम विवादित धार्मिक स्थल (मंदिर-मकबरा) के बाहर महिलाओं और पुलिस के बीच हुए विवाद के बाद बुधवार रात पुलिस ने कई घरों पर दबिश दी। यह पूरी कार्रवाई आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई। दबिश के दौरान महिलाओं और सदर कोतवाल तारकेश्वर राय के बीच जमकर बहस हुई।
पुलिस ने इस मामले में सपा से निष्कासित और वर्तमान में बीजेपी कार्यकर्ता पप्पू सिंह चौहान की पत्नी पद्मा सिंह को मुख्य आरोपी बनाया है। पद्मा सिंह ने पुलिस पर महिलाओं के साथ हाथापाई और अभद्रता करने का आरोप लगाया है। पुलिस के अनुसार, पप्पू सिंह चौहान का नाम विवादित धार्मिक स्थल के पूर्व मामलों में भी दर्ज है।
बुधवार को आबूनगर रेड्डया मोहल्ले में कुछ महिलाओं ने विवादित स्थल को “ठाकुर द्वारा” मानकर दीप जलाए और आरती की थी। महिलाएं बैरिकेडिंग के बाहर गली में मौजूद थीं। सूचना पर सदर कोतवाल भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे, जहां दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई। इस दौरान बने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिनमें दोनों ओर से अपशब्द बोले जाने की बात सामने आई।
रात को महिला कांस्टेबल मंजू की तहरीर पर पुलिस ने पद्मा सिंह और 20 अन्य महिलाओं के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा, गाली-गलौज और झूठे मुकदमे में फंसाने की कोशिश की धाराओं में एफआईआर दर्ज की। इसके बाद पुलिस पप्पू सिंह को गिरफ्तार करने उनके घर पहुंची। वहां पद्मा सिंह ने पुलिस से कहा कि “अगर पूजा करना अपराध है, तो कार्रवाई मुझ पर की जाए, मेरे पति ने कुछ नहीं किया।” इस दौरान दोनों पक्षों में करीब पांच मिनट तक बहस चली, जो कैमरे में कैद हो गई। पुलिस को आखिरकार बिना गिरफ्तारी लौटना पड़ा।
दबिश के बाद इलाके में तनाव का माहौल रहा। गुरुवार सुबह कई घरों में ताले लटके दिखे। सदर कोतवाल तारकेश्वर राय खुद पूरे दिन विवादित स्थल की निगरानी में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि पुलिस से अभद्रता करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मठ मंदिर संघर्ष समिति ने इससे पहले 7 अगस्त को स्थल की सफाई की अनुमति के लिए जिला प्रशासन को ज्ञापन दिया था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद 11 अगस्त को हिंदू संगठनों और बीजेपी जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल की अपील पर बड़ी संख्या में लोग कर्पूरी ठाकुर चौराहे पर जुटे थे। भीड़ ने बैरिकेडिंग तोड़कर स्थल तक पहुंचकर तोड़फोड़ की थी, जिससे दो समुदाय आमने-सामने आ गए थे। उस घटना में बीजेपी नेता अभिषेक शुक्ला, आशीष त्रिवेदी, पप्पू सिंह चौहान सहित 160 से अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई थी।
विवादित स्थल पर फिलहाल अस्थायी पुलिस चौकी बनी हुई है और चारों ओर 15 फीट ऊंची बैरिकेडिंग लगाई गई है। यह मामला सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में विचाराधीन है, जिसकी अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।
बुधवार की रात भी हालात तनावपूर्ण हो गए थे। पुलिस के अनुसार, एक ओर जहां हिंदू महिलाएं दीप जलाने जा रही थीं, वहीं दूसरी ओर विशेष समुदाय के पुरुष और महिलाएं लाठी-डंडे लेकर गलियों में आ गए और नारेबाजी शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ने से पहले पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए विशेष समुदाय के लोगों को चेतावनी दी और हिंदू महिलाओं को वापस लौटा दिया, जिससे संभावित टकराव टल गया।