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मोहर्रम पर निकला जोड़ियों का जुलूस, अजादारों ने किया अंगारे मातम, VIDEO

मोहर्रम की नवमी पर शनिवार को अंजुमन सज्जादिया असगरिया के तत्वावधान में दुलहीपुर में शिया परंपरा के अनुसार जोड़ियों का जुलूस बड़े ही श्रद्धा और आस्था के साथ निकाला गया। शिया बड़ा दरवाजा मस्जिद के समीप जुलूस में शामिल अजादारों ने अंगारों और जंजीरों पर चलकर मातम किया। इस दौरान फिजा या हुसैन की गूंज से भर उठी। जुलूस की शुरुआत से पहले आयोजित मजलिस में मौलाना साहब ने कर्बला के महान बलिदान का जिक्र करते हुए कहा कि "हजरत इमाम हुसैन ने इस्लाम और इंसानियत की रक्षा के लिए अपने पूरे घराने की कुर्बानी दे दी, यहाँ तक कि अपने छह माह के मासूम बेटे हजरत अली असगर की भी शहादत पेश की।" उनकी बातों ने उपस्थित अजादारों को भावुक कर दिया और लोगों ने मातम किया। मजलिस के बाद नौहा ख्वानी की गई और फिर जोड़ियों का जुलूस निकाला गया। जुलूस में अजादार 'मुनाकिब-ए-दोस्त इब्ने साकिये कौसर हुसैन हैं' पढ़ते हुए आगे बढ़ते रहे। जुलूस में सबसे आगे हुसैनी बाजा बज रहा था, जिसके पीछे अजादार जोड़ियाँ लेकर चल रहे थे। विशेष स्थान पर पहुंचकर जोड़ियों को नजर-ए-हुसैन के रूप में पेश किया गया। जगह-जगह स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं से जुलूस का स्वागत किया, जिससे श्रद्धा और भाईचारे का दृश्य और भी भावुक हो उठा। जुलूस में हजारों की संख्या में क्षेत्रीय लोगों की भागीदारी रही, जिसमें महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने भी पूरे आदर और आस्था से हिस्सा लिया।

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