बाराबंकी में ककरहिया मोहल्ला स्थित कचरा निस्तारण संयंत्र में एक और मशीन की स्थापना से कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया में तेजी आई है। इस नवीनतम प्रगति का उद्देश्य बारिश के मौसम के आगमन से पहले परिसर को पुराने कचरे के ढेर से मुक्त करना है। मशीनों की सहायता से कचरे को चार विशिष्ट श्रेणियों में अलग किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक घटक का प्रभावी ढंग से पुन: उपयोग संभव हो रहा है। इस उन्नत प्रक्रिया के तहत, कचरे को विभिन्न उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित किया जा रहा है। कचरे से ईंटें और प्लास्टिक सामग्री को अलग किया जाता है, जिसके बाद जैविक खाद का उत्पादन किया जाता है। इस उत्पादन प्रक्रिया में सड़क निर्माण में प्रयुक्त होने वाली छोटी गिट्टियां और प्लास्टिक के टुकड़े भी अलग कर लिए जाते हैं। इन सभी चार प्रकार की सामग्रियों का अब अलग-अलग क्षेत्रों में उपयोग हो रहा है। जैविक खाद खेतों की उर्वरता बढ़ाने के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है। प्लास्टिक सामग्री को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा रहा है। ईंट का इनका उपयोग सड़क निर्माण में गिट्टी के रूप में किया जा रहा है। छोटी गिट्टियां और प्लास्टिक कचरा भी सड़कों के निर्माण कार्यों में इस्तेमाल किया जा रहा है। एक महत्वपूर्ण विकास यह है कि शीतल पेयजल की बोतलों से फर्नीचर और कपड़े बनाने के लिए एक निजी शीतल पेय कंपनी ने नगर पालिका के साथ अनुबंध किया है। इस पहल से यह सुनिश्चित हो रहा है कि हर प्रकार के कचरे का प्रभावी ढंग से निपटान और उपयोग हो सके। प्रतिदिन शहर में करीब 80 क्विंटल कचरा निकलता है। लगभग सौ ई-रिक्शा शहर भर में घर-घर जाकर सूखा और गीला कचरा एकत्र कर रहे हैं, जिसे बाद में कचरा निस्तारण संयंत्र तक पहुंचाया जाता है। यह व्यवस्था न केवल कचरा संग्रह को सुव्यवस्थित करती है, बल्कि शहर को स्वच्छ बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। नगर पालिका के ईओ संजय कुमार शुक्ल ने बताया कि संयंत्र में पहले से जमा करीब 65 टन कचरे का सफलतापूर्वक निपटान किया गया है। चार श्रेणियों में कचरे का विभाजन और उसके बाद उसे निर्धारित स्थानों पर भेजना, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ''कचरे से कंचन'' बनाने की परिकल्पना को साकार कर रहा है।