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VIDEO: महाशिवरात्रि से पूर्व नेपालगंज के खड़ेश्वर/जुंगेश्वर महराज मंदिर में उमड़ी श्रद्धा

नेपालगंज बांके में महाशिवरात्रि में अब केवल दो दिन शेष हैं। ऐसे में नेपाल के बांके जिले के नेपालगंज स्थित बागेश्वरी मंदिर परिसर में विराजमान खड़ेश्वर महराज (भगवान शिव) के मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से हजारों की संख्या में भक्त जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। यहां भगवान शिव की प्रतिमा खड़ी अवस्था में है, इसलिए उन्हें ‘खड़ेश्वर महराज’ कहा जाता है। वहीं स्थानीय श्रद्धालु उन्हें ‘जुंगेश्वर महराज’ भी कहते हैं। इसका कारण यह है कि प्रतिमा में भगवान शिव के मूंछ दर्शाए गए हैं। नेपाली भाषा में मूंछ को ‘जुंगा’ कहा जाता है, इसी से ‘जुंगेश्वर’ नाम प्रचलित हुआ। यह स्वरूप भक्तों के लिए विशेष आकर्षण और आस्था का केंद्र बना हुआ है। महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजन-विधि की तैयारियां की जा रही हैं। श्रद्धालु शहद, दूध, गंगाजल, बेलपत्र, बेर और धतूरा अर्पित कर भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं। मंदिर में वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार भक्त श्रद्धा भाव से चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्ची भावना से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है। भारत-नेपाल सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक यह मंदिर दोनों देशों की आस्था को जोड़ने का कार्य कर रहा है। उत्तर प्रदेश के बहराइच, श्रावस्ती, लखनऊ, कानपुर, उत्तराखंड समेत विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। मंदिर के महंत पदमनाथ योगी ने बताया कि लगभग 160 वर्ष पूर्व राणा शासन काल में जंग बहादुर राणा के समय मंदिर का निर्माण कराया गया था। उन्होंने बताया कि उनका परिवार नाथ संप्रदाय से जुड़ा है और पीढ़ियों से मंदिर की सेवा-पूजा करता आ रहा है। महाशिवरात्रि को देखते हुए मंदिर परिसर में विशेष सजावट, सुरक्षा और व्यवस्थाएं की जा रही हैं। अनुमान है कि पर्व के दिन हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचेंगे। नेपालगंज का खड़ेश्वर/जुंगेश्वर महराज मंदिर आज भी भारत और नेपाल के श्रद्धालुओं के लिए अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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