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अयोध्या में रुदौली के राजकीय पशु चिकित्सालय में सुबह 10:15 बजे तक खाली मिलीं कुर्सियां, डॉक्टर-कर्मचारी नदारद

अयोध्या के रुदौली स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में चिकित्सक और कर्मचारियों की मनमानी का मामला सामने आया है। शासन की ओर से निर्धारित समय के बावजूद मंगलवार को सुबह 10:15 बजे तक अस्पताल में डॉक्टर और कर्मचारी मौजूद नहीं थे। अमर उजाला की टीम के रियलिटी चेक में अस्पताल खुला मिला, लेकिन चिकित्सक और कर्मचारियों की कुर्सियां खाली पड़ी थीं। पशुओं को दिखाने के लिए पहुंचे ग्रामीण डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे। रियलिटी चेक के दौरान पशु चिकित्सक डॉ. अनुराग यादव की कुर्सी खाली मिली। इसी तरह एएलयू रितिका गौतम और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कमलेश भी अस्पताल में मौजूद नहीं मिले। अस्पताल में चिकित्सक और कर्मचारियों की गैरमौजूदगी से दूर-दराज से अपने पशुओं का इलाज कराने पहुंचे पशुपालकों को इंतजार करना पड़ा। वजीरगंज निवासी राममिलन, खैरनपुर निवासी शफीक अहमद और पूरे खान निवासी फरानवाज अपने पशुओं को दिखाने के लिए सुबह करीब आठ बजे ही अस्पताल पहुंच गए थे। उनका कहना था कि काफी देर बीतने के बाद भी चिकित्सक या कोई कर्मचारी अस्पताल नहीं पहुंचा। पशुओं के इलाज के लिए सरकारी अस्पताल पर निर्भर ग्रामीणों को डॉक्टर का इंतजार करना पड़ा। खरगीपुरवा भैसोली निवासी रामनेवाज यादव ने बताया कि वह अपने गांव में पशुओं के टीकाकरण की जानकारी देने के लिए अस्पताल आए थे। उनके गांव में अभी तक पशुओं का टीकाकरण नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि भैंसों में गला घोंटू बीमारी का खतरा बना हुआ है। इसी संबंध में चिकित्सक को सूचना देने के लिए वह अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन यहां कोई डॉक्टर या कर्मचारी नहीं मिला। रामनेवाज ने बताया कि अस्पताल खुला हुआ था, लेकिन मौके पर जिम्मेदार कर्मचारियों के नहीं मिलने से उन्हें वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि पशु चिकित्सालय में डॉक्टर की उपलब्धता बेहद जरूरी है, क्योंकि पशुओं की बीमारी और टीकाकरण से संबंधित मामलों में समय पर चिकित्सकीय सलाह नहीं मिलने से पशुपालकों की परेशानी बढ़ जाती है। शासन के अनुसार पशु चिकित्सालय में चिकित्सक और कर्मचारियों की ड्यूटी का समय सुबह 8:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक निर्धारित है। ऐसे में सुबह 10:15 बजे तक अस्पताल में चिकित्सक और कर्मचारियों के मौजूद नहीं मिलने से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल में चिकित्सक और कर्मचारियों के आने-जाने का कोई निश्चित समय नहीं रह गया है। जब मन होता है तब आते हैं और जब मन होता है चले जाते हैं। पशुपालकों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में समय से चिकित्सक उपलब्ध न होने के कारण उन्हें निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। राजकीय पशु चिकित्सालय ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां रोजाना आसपास के गांवों से लोग अपने पशुओं का इलाज, टीकाकरण और अन्य चिकित्सकीय सलाह लेने पहुंचते हैं। ऐसे में निर्धारित समय में चिकित्सक और कर्मचारियों की मौजूदगी नहीं होना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। रियलिटी चेक में सामने आई तस्वीरों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और अस्पताल में चिकित्सक व कर्मचारियों की समय से उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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