अयोध्या में दीपोत्सव के एक दिन पहले शनिवार को विदेशी कलाकारों ने रामलीला मंचन करके भक्तिभाव को नई ऊंचाई दी। रामनगरी के तीन मंचों पर अलग-अलग तीन देशों के कलाकारों ने रामकथा की प्रस्तुति दी। बड़ी देवकाली के मंच पर जब इंडोनेशिया के कलाकारों ने लंका दहन का दृश्य प्रस्तुत किया, तो पूरा वातावरण जय-जयकार से गूंज उठा। हनुमान की भूमिका में उतरे कलाकार का हर भाव, हर अंग-संचालन ऐसा प्रतीत हुआ जैसे अग्नि की लपटों में भी शांति और शक्ति दोनों का संगम हो। उनकी आंखों में सीता-हरण का संताप था, तो भुजाओं के विस्तार में धर्म की जयघोष। अग्नि की कृत्रिम लपटों के बीच जब वे लंका की ओर बढ़े, तो दर्शक दीर्घा मंत्रमुग्ध हो उठी। मानो स्वयं आकाश तक “जय हनुमान” का घोष पहुंच गया हो। 15 मिनट के प्रसंग में रावण की गर्वोन्नत मुद्रा, सीता का करुण प्रतीक, और रामदूत के रूप में हनुमान की तेजस्विता, सबने मिलकर कथा को जीवंत चित्रशाला बना दिया। पारंपरिक इंडोनेशियाई वेशभूषा में सजे कलाकारों की नृत्य अभिव्यक्ति, मुखाकृतियों के सूक्ष्म भाव और संगीत की गूंज ने यह सिद्ध कर दिया कि रामकथा केवल भारत की नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व की आत्मा है। 10 कलाकारों की टीम में दो महिला कलाकार भी शामिल रहीं। कलाकार डेनी युसूफ ने कहा कि अयोध्या आकर बहुत अच्छा लगा, अयोध्या की धार्मिकता प्रभावित करती है। यहां के लोगों से खूब प्यार मिला है। रामकथा की नगरी में रामकथा की प्रस्तुति अद्भुत पल रहा।