यूपी के अमेठी में दादरा गांव में स्थित प्राचीन मां हिंगलाज मंदिर माघ गुप्त नवरात्र के पहले दिन आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्तों ने पिंडी दर्शन कर मां के चरणों में मत्था टेकते हुए सुख-शांति और मनोकामना पूर्ति की कामना की। मान्यता के अनुसार यह मंदिर देवी के 51 सिद्ध पीठों में एक माना जाता है। मंदिर का संबंध पाकिस्तान के हिंगलाज पर्वत से जुड़ा बताया जाता है। जिला मुख्यालय गौरीगंज से करीब 25 किलोमीटर दूर मुसाफिरखाना विकास क्षेत्र में स्थित यह शक्तिपीठ नवरात्र के दिनों में विशेष श्रद्धा का केंद्र बन जाता है। सुबह से देर रात तक भक्तों की आवाजाही बनी रहती है। मंदिर का इतिहास लगभग 600 वर्ष पुराना बताया जाता है। संत बाबा पुरुषोत्तम दास ने इसकी स्थापना की थी। वह गोस्वामी तुलसीदास के समकालीन माने जाते हैं। मान्यता है कि बाबा पुरुषोत्तम दास ने बलूचिस्तान क्षेत्र में 12 वर्षों तक कठोर तप कर मां भवानी को प्रसन्न किया। क्षेत्र की सुख-शांति और महामारी से मुक्ति की कामना पर देवी दादरा तक आईं। यात्रा के दौरान अहोरवा वन क्षेत्र में देवी ने विराम लिया और संत को त्रिशूल प्रदान किया। वही त्रिशूल आज भी मंदिर में स्थापित है। मंदिर परिसर में प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को मेला लगता है। नवरात्र काल में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। दुर्गा सप्तशती पाठ से वातावरण भक्तिमय बना रहता है। इस शक्तिपीठ में देश के कई प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि भी दर्शन कर चुके हैं, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी शामिल हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां हिंगलाज के दर्शन मात्र से कष्टों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।