महाकुंभ के दौरान यहां संगम नोज पर पैर रखने के लिए जगह नहीं थी और दिन रात का पता नहीं चलता था। इसी संगम नोज पर बृहस्पतिवार को मामूली भीड़ रही।। कुछ श्रद्धालु की स्नान करते दिखे। दोपहर एक बजे। काली मार्ग जो श्रद्धालुओं से दिन रात खचाखच भरा रहता था वहां पर भी सन्नाटे जैसी स्थिति रही।