विहिप प्रांत कार्यालय में आयोजित सुंदरकांड पाठ में पहुंचे केशव ने कहा कि सिंघल ने वेदों की शिक्षा से लेकर, प्रकल्प वनवासी क्षेत्रों में प्रारंभ कराया। उन्हें सामाजिक समरसता का पुरोधा कहा जा सकता है। उनके जीवन का एक-एक क्षण राष्ट्र सेवा में समर्पित रहा।