अब्दुल बासित ने कहा कि ढली-कैथलीघाट फोरलेन निर्माण में कई तरह की चुनौतियां हैं। एक पुल में एक पिलर की ऊंचाई दो कुतुब मीनार(150 मीटर) है। शकराल पुल के पियर की ऊंचाई 210 मीटर है जोकि करीब तीन कुतुब मीनार के बराबर है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितना चुनौतीपूर्ण कार्य है। कहा कि टनल सुरक्षा में अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुसरण किया जा रहा है। सेफ्टी ऑडिट भी किया गया है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया चंडीगढ़ के साथ भी एनएचएआई ने एमओयू किया है। जीएसआई लगातार टनलों का निरीक्षण करता है। टनल से भूस्खलन भी कम होता है। क्योंकि पहाड़ी को काटने से भूस्खलन की घटनाएं ज्यादा होती हैं।