भाजपा नेता सतीश पूनिया ने निभाई मायरे की रस्म
- फोटो : अमर उजाला
पारंपरिक अंदाज में मायरे की रस्म
समारोह में डॉ. सतीश पूनिया ने न केवल मेहमानों से आत्मीय मुलाकात की, बल्कि पारंपरिक गीत-संगीत का भी आनंद उठाया। उन्होंने फूलों का तारों का सबका कहना है गीत गाया और फूलों का चमकता गहना हो गाने पर मंच पर ठुमके भी लगाए। डॉ. पूनिया का यह अंदाज कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों के लिए बेहद यादगार बन गया।
सामाजिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति की सराहना की
डॉ. पूनिया ने अपने संबोधन में कहा कि सामाजिक और पारिवारिक संस्कार ही भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं और ऐसे अवसरों पर इन मूल्यों को सहेजना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने मुंदड़ा परिवार की समाजसेवा, संगठन के प्रति सक्रियता और पारिवारिक मूल्यों के पालन की सराहना करते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ता सदैव ऐसे संस्कारों को जीते हैं और आगे बढ़ाते हैं।
भाजपा नेता सतीश पूनिया ने निभाई मायरे की रस्म
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समाज के विभिन्न वर्गों की उपस्थिति
इस विवाह समारोह में बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य नागरिक, भाजपा कार्यकर्ता, समाजसेवी और विभिन्न वर्गों के लोग मौजूद रहे। सभी ने डॉ. पूनिया का आत्मीय स्वागत किया और उनके साथ सामूहिक स्मृतियां साझा कीं। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह पारिवारिक, भावनात्मक और संस्कृति से ओतप्रोत रहा।
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नवविवाहित जोड़े को दीं शुभकामनाएं
डॉ. सतीश पूनिया ने वर-वधू को अपने हाथों से आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद, सफल और समृद्ध जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का एक पवित्र मिलन होता है। ऐसे अवसर पर समाज का एकजुट होना भारतीय जीवनशैली की विशेषता है।