दौसा विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जगमोहन मीणा को अपना उम्मीदवार बनाया है। जगमोहन मीणा डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा के छोटे भाई हैं। जगमोहन ने कहा कि यह टिकट उन्हें अपने प्रयासों से मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जाति के लिए नहीं, बल्कि विकास के लिए राजनीति करेंगे।
पार्टी के प्रति जताया आभार
15 साल के लंबे अंतराल के बाद, भाजपा ने जगमोहन मीणा को दौसा से अपना उम्मीदवार बनाकर टिकट का वनवास खत्म किया है। उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को धन्यवाद दिया और कहा कि यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। जगमोहन मीणा ने कहा कि मानवता ही मेरा पहला धर्म है।
मंत्री पद के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया
डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा के मंत्री पद के इस्तीफे के सवाल पर जगमोहन मीणा ने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत फैसला था। उन्होंने बताया कि मंत्री ने जनता के प्रति आहत होकर यह निर्णय लिया और वह अभी सोच रहे हैं कि आगे क्या करना है।
टिकट मिलने का कारण
जगमोहन मीणा ने कहा कि उनके टिकट में जनरल और रिजर्व कैटिगरी का कोई मामला नहीं है। उन्होंने बताया कि वह पहले से ही पार्टी के लिए काम करते आ रहे हैं। भैरों सिंह शेखावत और ललित किशोर चतुर्वेदी जैसे नेताओं के साथ मिलकर काम किया है। उन्होंने पार्टी द्वारा उन पर विश्वास जताने के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि दौसा विधानसभा से भाजपा की जीत निश्चित है।
कांग्रेस पर कसा तंज
जगमोहन मीणा ने कांग्रेस पर तंज कसा कि पिछले चुनाव में कांग्रेस ने रिजर्वेशन के नाम पर लोगों को बहका दिया था, जिसके चलते भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि टिकट मिलने में काफी लंबा सर्वे हुआ था और पार्टी ने कई स्तरों पर मंथन के बाद उन पर विश्वास जताया। भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बताते हुए, जगमोहन मीणा ने कहा कि पार्टी में टिकट मांगने वालों की लाइन हमेशा रहती है। उन्होंने बताया कि वह 2014 से भाजपा के टिकट के लिए प्रयासरत थे।
‘गलती होना मानव स्वभाव है’
हाल ही में भाजपा सरकार द्वारा प्रधानाध्यापकों के तबादलों के संबंध में जगमोहन मीणा ने कहा कि सरकार के काम बड़े होते हैं और गलती होना मानव स्वभाव है। उन्होंने कहा कि इसे सुधारना मानव की बड़ी बात है। जगमोहन मीणा ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस एक विरोधी दल है, जो हमेशा किसी न किसी आरोप लगाती रहती है। उन्होंने डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा की प्रतिबद्धता को सराहा और कहा कि उन्होंने किसी के दबाव में आकर टिकट की पैरवी नहीं की।