श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार कुलदीप सिंह गजराज ने छोटे घल्लूघारे के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए सिख कौम से इतिहास से प्रेरणा लेकर आपसी प्रेम और एकता बनाए रखने की अपील की। गुरुद्वारा मंजी हॉल साहिब में कथा के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि 1746 में काहनूवान के जंगलों में शहीद हुए सिंहों, सिंहनियों, बच्चों और बुजुर्गों की कुर्बानी कौम के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि अत्याचारों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद सिखों ने गुरु का साथ नहीं छोड़ा। जत्थेदार ने एक अहम कानूनी बिल पर चिंता जताते हुए कहा कि सिखों की सहमति और पंथक संस्थाओं की सलाह के बिना कोई भी कानून स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और अकाल तख्त को दरकिनार कर लिए गए फैसले मान्य नहीं होंगे।