पारिस्थितिक दृष्टि से संवेदनशील शिवालिक क्षेत्र में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई और व्यापार के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए होशियारपुर वन मंडल को बड़ी सफलता मिली है। विभाग ने जांच के दौरान अवैध रूप से काटी गई खैर की लकड़ी की आपूर्ति शृंखला के अंतिम प्रसंस्करण केंद्र तक पहुंचते हुए होशियारपुर–टांडा रोड स्थित गांव सोठियाना में चल रही एक कत्था फैक्ट्री को सील कर दिया है। खैर के पेड़ों की अवैध कटाई की घटनाओं को देखते हुए वन विभाग द्वारा पूरे होशियारपुर वन मंडल में गश्त, निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई तेज कर दी गई है। हाल के अभियानों के दौरान अवैध वन उपज के परिवहन में कथित रूप से शामिल लगभग 10–12 वाहनों को भी जब्त किया जा चुका है तथा विभिन्न मामलों की जांच जारी है। गत सप्ताह होशियारपुर वन मंडल की सतीआल बीट और बिछोही बीट में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई की घटनाएं सामने आई थीं। जांच के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों ने सीसीटीवी फुटेज की जांच करते हुए एक संदिग्ध वाहन की गतिविधियों का पता लगाया। इसकी कड़ी दीपांशु मेहता के स्वामित्व वाली मैसर्स Amyara Herbs Pvt. Ltd. नामक कत्था फैक्ट्री तक पहुंची। यह फैक्ट्री होशियारपुर वन मंडल की हरियाणा रेंज के अंतर्गत गांव सोठियाना में स्थित है। प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर वेंकटेश, आईएफएस, उप-मंडल वन अधिकारी, होशियारपुर धर्मवीर व रेज अफसर माहिलपूर अमरवीर सिंह तके नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने गत रात्रि फैक्ट्री पर छापा मारा। फैक्ट्री परिसर में भारी मात्रा में खैर की लकड़ी बरामद हुई, जिसकी प्रारंभिक कीमत करोड़ों रुपये होने का अनुमान है। फैक्ट्री मालिक मौके पर मिली खैर की लकड़ी के वैध स्रोत और स्वामित्व को प्रमाणित करने वाला कोई वैध परमिट, ट्रांजिट पास, खरीद रिकॉर्ड अथवा अन्य कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद फैक्ट्री परिसर और वहां मिली संदिग्ध वन उपज को वन विभाग द्वारा सील एवं जब्त कर लिया गया। बरामद खैर की अत्यधिक मात्रा को देखते हुए विभाग इस पहलू की भी जांच कर रहा है कि यह लकड़ी आसपास के वन मंडलों अथवा पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश से तो नहीं लाई गई। लकड़ी के वास्तविक स्रोत और पूरी आपूर्ति शृंखला का पता लगाने के लिए संबंधित रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, वाहनों की आवाजाही तथा परिवहन मार्गों की जांच की जा रही है। बरामद सामग्री की सही मात्रा और कीमत विस्तृत आकलन के बाद निर्धारित की जाएगी। मंडल वन अधिकारी, होशियारपुर, श्री धर्मवीर दैड़ू, आईएफएस ने कहा: “यह वन विभाग के लिए एक बड़ी सफलता है, क्योंकि हम अवैध कटाई की आपूर्ति शृंखला के अंतिम प्रसंस्करण केंद्र तक पहुंचने में सफल हुए हैं। बरामद खैर की भारी मात्रा एक संगठित आपूर्ति नेटवर्क की संभावित संलिप्तता की ओर संकेत करती है। आगे की जांच से लकड़ी के वास्तविक स्रोत के साथ-साथ अवैध कटाई, परिवहन, भंडारण और प्रसंस्करण में शामिल अन्य बिचौलियों का भी पता लगाया जाएगा। आसपास के वन मंडलों अथवा हिमाचल प्रदेश से खैर की आपूर्ति किए जाने की संभावना की भी जांच की जा रही है। इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” कत्था फैक्ट्री बिना अनिवार्य लाइसेंस अथवा पंजीकरण के संचालित पाई गई, जो पंजाब वुड बेस्ड इंडस्ट्रीज नियम, 2019 के नियम 7(3) और 9(4) का उल्लंघन है तथा नियम 17(1) के तहत दंडनीय है। मौके से बरामद बेहिसाबी खैर की लकड़ी, कत्था, मशीनरी और वाहनों को भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 52 के तहत जब्त किया गया है। भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 32, 33, 52 और 77 तथा पंजाब संशोधन अधिनियम, 2004 के तहत एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। अवैध कटान के स्रोत, परिवहन और पूरी आपूर्ति शृंखला का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य संबंधित कानूनी धाराएं भी जोड़ी जाएंगी।