पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस के अवसर पर तरनतारन शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धा और सम्मान के साथ आयोजित किए जा रहे हैं। गुरुद्वारा साहिबों में अखंड पाठ साहिब के भोग डाले जा रहे हैं, कीर्तन दरबार सजाए जा रहे हैं तथा गुरु साहिब की महान शहादत को याद किया जा रहा है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक होकर गुरु जी की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प ले रहे हैं। विभिन्न स्थानों पर ठंडे मीठे जल की छबीलें तथा लंगर लगाए गए हैं, जहां संगतों की सेवा की जा रही है। धार्मिक नेताओं ने अपने संबोधनों में कहा कि गुरु अर्जन देव जी ने धर्म, सत्य और मानवता की रक्षा के लिए महान बलिदान दिया। उनकी शहादत सिख इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है, जो हमें हर परिस्थिति में ईश्वर की इच्छा को स्वीकार करने तथा मानवता की सेवा करने की प्रेरणा देता है। उल्लेखनीय है कि तरनतारन नगर की स्थापना भी गुरु अर्जन देव जी द्वारा की गई थी, जिसके कारण इस पवित्र धरती का सिख इतिहास में विशेष महत्व है। समस्त संगतों द्वारा गुरु साहिब की शहादत को कोटि-कोटि नमन करते हुए *सरबत के भले* की अरदास की जा रही है।