श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ग्यानी रघबीर सिंह ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में सिरसा डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला देश में कानून के दोहरे मापदंडों को उजागर करता है। ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि जब से डेरा प्रमुख को बार-बार पैरोल मिलनी शुरू हुई थी, तभी से यह कयास लगाए जा रहे थे कि सरकारें और कानून व्यवस्था उसके पक्ष में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर आरोपों वाले साधु को राहत दी जा रही है, जबकि दूसरी तरफ बंदी सिंह पिछले 32 वर्षों से धर्म के लिए जेलों में बंद हैं। उन्होंने अफसोस जताया कि सजा पूरी होने के बावजूद सिख कैदियों को न तो पैरोल दी जा रही है और न ही रिहा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह फैसला हैरान करने वाला है और इससे सिख समुदाय के मन में अलगाव की भावना और गहरी हो रही है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए, नहीं तो लोकतंत्र में लोगों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।