बुंदेलखंड अंचल अपनी अनूठी सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। यहां साल भर के पर्व अपने ही अंदाज में मनाए जाते हैं। नवरात्रि में यहां भक्त पूरे नौ दिन मनोभाव से माता की सेवा करते हैं। खासकर शारदीय नवरात्रि में जहां माता की एक से बढ़कर एक प्रतिमाएं पंडालों में विराजित कराई जाती है। वहीं, जवारा के खप्पर लगाना भी माता के पूजन की एक पद्धति है।
बता दें कि अंचल में जवारे को लेकर श्रद्धालुओं में गजब की आस्था देखने को मिलती है। नौ दिन तक माता रानी की पूजा अर्चना करने के बाद नवमी तिथि को इनका विसर्जन किया जाता है। लेकिन इससे पहले नवरात्रि शुरू होते ही अपने पारंपरिक और पुश्तैनी जवारे की खप्पर या घट की स्थापना करवाई जाती है।
नवरात्रि के नौ दिनों में माता आदिशक्ति की नौ रूपों में उपासना की जाती है। माता को प्रसन्न करने और अपनी मनोकामना को पूरी करने के लिए भक्तों के द्वारा तरह-तरह के जतन किए जाते हैं। नवरात्रि पर सदियों से चली आ रही अलग-अलग तरह की परंपराएं देखने को भी मिलती हैं। इन्हीं में से सामूहिक रूप से जवारा विसर्जन की बुंदेली परंपरा भी एक है। शुक्रवार को जिले भर में जवारे निकाले गए तथा इनका जल स्त्रोतों में विसर्जन किया गया।