मध्यप्रदेश के खरगोन जिला कलेक्टर न्यायालय के द्वारा सरकारी जमीन पर अवैध उत्खनन करने वाले के खिलाफ बड़ा आदेश दिया गया है। इस मामले में साल 2019 में तत्कालीन जिला खनिज अधिकारी ज्ञानेश्वर तिवारी ने गोगावां तहसील के महूमांडली और अगरबाई गांव में सरकारी जमीन पर अवैध उत्खनन करने पर पूरे मामले की जांच कराई थी। उसके बाद जांच रिपोर्ट खनिज इंस्पेक्टर प्रियंका अजनार ने प्रस्तुत की थी।
वहीं, इस प्रकरण को जिला कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था, जिसमे दोनों पक्षों को सुनने के बाद शुक्रवार को जिला कलेक्टर न्यायालय ने 17 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश जारी किया है। बता दें कि इस आदेश में पट्टेदार गिट्टी क्रेशर संचालक शरदचंद पिता नंदकिशोर जायसवाल को बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन करने का दोषी पाया गया है। यही नहीं समय सीमा में जुर्माना नहीं भरने पर जुर्माने की दोगनी दर से वसूली भी किए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
लगाया है 17 करोड़ रुपये का जुर्माना
इस पूरे मामले को लेकर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट कर्मवीर शर्मा ने बताया कि खरगोन में अवैध उत्खनन से जुड़ी जितनी भी गतिविधियां हैं, उन पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। इसी के संबंध में एक मामला यहां न्यायालय में लंबित चल रहा था। जो कि गोगांवा क्षेत्र का है। उसमें जुर्माना लगाने का काम किया गया है। इसमें क्रेशर और अन्य अवैध उत्खनन की गतिविधियां की गई थी। इस मामले में पर्यावरण की क्षति और अवैध उत्खनन जैसे सभी मामलों को मिलाकर कुल 17 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
समय सीमा में जुर्माना नहीं भरने पर वसूलेंगे दोगुना
यही नहीं जिला कलेक्टर ने बताया कि अवैध उत्खनन को लेकर जिले में लगातार बड़ी कार्रवाईयां की जा रही हैं। इसके चलते ही गोगावां में कार्रवाई की गई थी। अवैध उत्खनन के इस मामले में जांच भी की गई थी, जिसके बाद प्रकरण बनाया गया था और शासन के नियम के अंतर्गत ही जुर्माना अधिरोपित किया गया है। यदि समय सीमा में जुर्माने की राशि जमा नहीं कराई जाती है, तो शासन के नियमानुसार जुर्माने के दोगुना राशि वसूल करने की प्रक्रिया को भी अपनाने के लिए निर्देशित किया गया है। इसलिए यदि वे समय सीमा में जुर्माने की राशि जमा नहीं कराएंगे तो भू राजस्व के तहत पैसा वसूल करने की कार्रवाई भी की जाएगी।