फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

न्याय दो या मार दो: 'चिता आंदोलन' होता जा रहा उग्र, सांकेतिक फांसी पर लटके, कहा- विस्थापन से खत्म होगी पहचान

Mon, 13 Jul 2026 09:42 PM IST
छतरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर

केन-बेतवा लिंक, मझगांव, रूंज, नैगुवा, एन टी पी सी में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा चिता आंदोलन विपरीत मौसम और प्रशासनिक दमन के बावजूद लगातार जोर पकड़ता जा रहा है, जय किसान संगठन के बैनर तले और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और आदिवासी महिलाओं के नेतृत्व में चल रहा चिता आंदोलन 11वें दिन व अमित भटनागर का आमरण अनशन 8वें दिन भी जारी रहा। चिता आंदोलन के साथ मिट्टी,जल, सांकेतिक फांसी सत्याग्रह के अलावा आज से सूली आंदोलन भी शुरू हो गया है।

परियोजना प्रभावितों को न्याय और भ्रष्टाचारियों को कड़ी सजा की मांग को लेकर अमित भटनागर द्वारा किए जा रहे आमरण अनशन के आठवें दिन उनका स्वास्थ्य तेजी से गिरने लगा है, साथ ही पांच दिन से आमरण अनशन पर बैठी पूना आदिवासी की तबीयत अचानक खराब हो गई। प्रशासन द्वारा किसी भी तरह का स्वास्थ्य परीक्षण, और डाक्टर की व्यवस्था नहीं की गई है, जबकि प्रशासन द्वारा आंदोलनकारियों को सर्व सुविधा के झूठे दावे किए जा रहे हैं।

ये भी पढ़ें-भोजशाला परिसर: मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई करेगा शीर्ष कोर्ट; हाईकोर्ट ने बताया था मंदिर; क्या है विवाद?

परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए बेहद मार्मिक तरीके अपनाए हैं। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों को गले में फांसी के फंदा डाले, सूली पर लटके और चिताओं के प्रतीकों के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन सरकार को यह याद दिलाने के लिए है कि विस्थापन के कारण उनकी जीवन-आजीविका और पहचान पूरी तरह खत्म होने की कगार पर है।

मिट्टी से बेदखली, मौत से बदतर
प्रदर्शन में शामिल एक ग्रामीण ने कहा, हमारी जमीन ही हमारी मां है, हमारी पहचान है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के नाम पर हमसे हमारी मिट्टी छीनी जा रही है। अगर हमें सम्मानजनक विस्थापन नहीं मिला, तो हम इस मिट्टी में दफन होने को तैयार हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन बिना ग्राम सभा बिना पारदर्शी सर्वे के गौरकानूनी बेदखली और विकास की कीमत पर अपनी बलि नहीं चढ़ने देंगे। उनका नारा न्याय दो या मार दो अब पूरे क्षेत्र में गूंज रहा है, जो प्रशासन की संवेदनहीनता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

क्रमिक भी अनशन जारी
अमित भटनागर के आमरण अनशन के साथ पूना आदिवासी का भी आमरण अनशन पांचवें दिन जारी है व सोमरनी आदिवासी, रामकली आदिवासी, हरवाई आदिवासी, पानबाई आदिवासी, कलावती आदिवासी, चम्पा आदिवासी, मझली बहू आदिवासी, अंगी बाई आदिवासी, अगना बाई आदिवासी, आशा आदिवासी, रानी आदिवासी, चंदा आदिवासी, ग्याप्रसाद कोंदर, लक्ष्मण कोंदर, बाबूलाल आदिवासी, हरि आदिवासी और तोरण सिंह आदिवासी ने आज आमरण अनशन किया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सभी विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा व पुनर्वास नहीं मिलता और कथित भ्रष्टाचार के मामलों की उच्च-स्तरीय जांच नहीं होती, तब तक यह आंदोलन और अधिक उग्र होता जाएगा।   छतरपुर का चिता आंदोलन  छतरपुर का चिता आंदोलन    छतरपुर का चिता आंदोलन   

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें