मुहर्रम की सातवीं तारीख पर हजरत इमाम हुसैन के भतीजे हजरत कासिम की शहादत की याद में राजधानी में पारंपरिक शाही मेंहदी का जुलूस निकाला गया। नवाबी परंपरा से जुड़े इस ऐतिहासिक जुलूस में बड़ी संख्या में अजादार शामिल हुए। जुलूस की शुरुआत बड़ा इमामबाड़ा से हुई, जो मातमी धुनों, नौहाख्वानी और अजादारों की सिसकियों के बीच रूमी दरवाजा से गुजरते हुए छोटा इमामबाड़ा की ओर रवाना हुआ। शाही मेंहदी का जुलूस लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब और नवाबी विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। जुलूस में शामिल अजादारों ने हजरत कासिम की शहादत को याद करते हुए मातम किया और कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। जुलूस मार्ग पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए पुलिस एवं प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए। जगह-जगह श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों द्वारा सबीलों की व्यवस्था भी की गई। मातमी माहौल और अकीदतमंदों की बड़ी भागीदारी के बीच शाही मेंहदी का यह जुलूस अपने पारंपरिक मार्ग से होते हुए छोटे इमामबाड़े तक पहुंचेगा, जहां धार्मिक रस्मों का आयोजन किया जाएगा।