होटल रिजेंटा में आयोजित ‘नेशनल रिलिजियस, लिटरेचर, आर्ट फेस्टिवल 2026’ के मंच पर कथक शिक्षिका आकांक्षा श्रीवास्तव ने अपने सांस्कृतिक अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वह पिछले 15-20 वर्षों से कथक नृत्य की शिक्षा दे रही हैं। इस दौरान राष्ट्रीय कथक संस्थान में करीब 10 वर्षों तक वरिष्ठ प्रवक्ता के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। आकांक्षा श्रीवास्तव ने बताया कि विदेश मंत्रालय की ओर से उन्हें ताजिकिस्तान में तीन वर्षों तक कथक सिखाने का अवसर मिला। ताजिक बच्चों को कथक की बारीकियां और गूढ़ता सिखाना उनके लिए बेहद अनोखा और यादगार अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि भाषा अलग होने के बावजूद कला ने संवाद का माध्यम बनाया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ताजिकी भाषा में गिनती का प्रयोग करते हुए कथक की एक ‘तिहाई’ भी प्रस्तुत की, जिसे दर्शकों ने सराहा। उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की खूबसूरती यह है कि भाषा और सीमाओं से परे भी यह लोगों को जोड़ने में सक्षम है। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलने पर खुशी जताते हुए आकांक्षा श्रीवास्तव ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने बताया कि उनके 1200-1500 से अधिक विद्यार्थी आज कला के क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं और नई ऊंचाइयां हासिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को कला के माध्यम से आत्मनिर्भर बनते देखना उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।