अमेरिका ने जैसे ही भारत पर 50 फीसदी भारी टैरिफ का बम फोड़ा तो भारत के सामने एक नई चुनौती खड़ी हुई, लेकिन सरकार ने इस मुश्किल को अब अवसर में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है। जी हाँ अवसर में, निर्यातकों की सुरक्षा और नए बाजार तलाशने के लिए वाणिज्य मंत्रालय ने एक बड़ी रणनीति पर काम तेज कर दिया है। योजना के तहत अब पश्चिम एशिया और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों के 50 देशों में भारत के निर्यात को बढ़ाने की तयारी तेज हो गई है। खास बात यह है कि भारत के कुल निर्यात में इन देशों की हिस्सेदारी पहले से ही करीब 90 फीसदी है।ऐसे में आंकड़ों के मुताबिक पहले जहां 20 देशों पर फोकस था, अब इसमें 30 और देशों को जोड़ा गया है ताकि अमेरिका से होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई हो सके। मंत्रालय ने निर्यात विविधीकरण, आयात प्रतिस्थापन, निर्यात क्षेत्र की प्रतिस्पर्धी क्षमता और उत्पादवार सुधार इन चार बड़े स्तंभों पर विस्तृत काम शुरू कर दिया है।
वहीं भारत के ब्यापार को लेकर बात करें तो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद जून में भारत का निर्यात 35.14 अरब डॉलर पर स्थिर रहा, जबकि व्यापार घाटा घटकर चार महीने के निचले स्तर 18.78 अरब डॉलर पर आ गया। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-जून में 112.17 अरब डॉलर का निर्यात किया गया। इस बीच, सी-फूड निर्यातकों के लिए भी सरकार ने नए बाजार तलाशने की अपील की है। उच्च टैरिफ से झींगा और अन्य समुद्री उत्पादों के अमेरिकी बाजार पर असर पड़ सकता है, ऐसे में यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, रूस, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया जैसे विकल्प मौजूद हैं।दूसरी तरफ सरकार छोटे कारोबारियों और निर्यातकों के लिए भी राहत की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो प्रस्ताव है कि 90 दिनों तक बकाया कर्जों के लिए ऋण गारंटी सुविधा दी जाए। 5 अरब रुपये तक के कारोबार वाले छोटे व्यवसायों को बैंकों से कर्ज दिलाने में मदद के लिए 10-15 फीसदी तक सरकारी गारंटी मिल सकती है। इसके लिए 40 अरब रुपये का प्रावधान संभव है। साथ ही, छोटे निर्यातकों को सावधि ऋण पर 70-75 फीसदी तक गारंटी देने की योजना भी बजट में शामिल की गई थी।