अमेरिका की धरती पर पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक ऐसा बयान दे डाला, जिसने न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पहले तो उन्होंने भारत को ‘मर्सिडीज कार’ और पाकिस्तान को ‘डंप ट्रक’ जैसी उपमा देकर चुटकी ली, लेकिन इसके बाद उनकी भाषा और भी आक्रामक हो गई। उन्होंने खुलेआम कहा—अगर पाकिस्तान के अस्तित्व पर खतरा आया, तो वह आधी दुनिया को अपने साथ ले डूबेगा। यह सीधी धमकी थी कि पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकेगा।इस बयान ने नई दिल्ली में खलबली मचा दी।
भारत के विदेश मंत्रालय ने मुनीर को कड़ी फटकार लगाई और कहा—"अंतरराष्ट्रीय समुदाय ऐसी टिप्पणियों में छिपी गैर-जिम्मेदारी को समझे। यह बयान इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान में परमाणु कमान और नियंत्रण व्यवस्था कितनी असुरक्षित है, खासकर वहां की सेना के आतंकवादी संगठनों से रिश्तों को देखते हुए।" मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी टिप्पणियां किसी मित्र देश की धरती से दी जा रही हैं।लेकिन सवाल उठता है—आख़िर मुनीर ने जो कहा, वह कितना गंभीर खतरा है? पाकिस्तान का परमाणु जखीरा कितना बड़ा है? और सबसे अहम, इन हथियारों पर असली नियंत्रण किसका है?
परमाणु हथियार लॉन्च करने की क्षमता का सवाल है, यह अभी भी सीमित और प्रयोगात्मक स्तर पर है। पाकिस्तान ने पानी से लॉन्च होने वाली क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया है, लेकिन इसे पूरी तरह ऑपरेशनल नहीं माना जाता। अब भारत के लिए यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने परमाणु हमले की धमकी दी हो। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने इसी तरह की धमकियां दी थीं, लेकिन भारत ने अपने सैन्य अभियान जारी रखकर इन्हें झूठा साबित कर दिया।कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि भारत ने पाकिस्तान के ‘किराना हिल्स’ स्थित परमाणु ठिकाने के पास तक निशाना साधा था। सोशल मीडिया पर यह अफवाह भी उड़ी कि इस ठिकाने का प्रबंधन अमेरिका के हाथ में है। हालांकि, भारत, पाकिस्तान और अमेरिका—तीनों ने इस दावे की न तो पुष्टि की और न ही खंडन किया।