नवरात्रि का व्रत केवल अन्न-जल का त्याग नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और अनुशासन का भी प्रतीक है। व्रत रखने वाले साधकों को इन नौ दिनों में अपने मन, वचन और कर्म से पूरी तरह सात्विक रहना चाहिए। ज्योतिष और धर्म शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि के व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब इसका पालन पूरे विधि-विधान और कठोर नियमों के साथ किया जाए। नियमों में हुई एक छोटी सी चूक भी आपके नौ दिनों के व्रत को खंडित कर सकती है।